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Monday, January 5, 2009

अन्तर

पत्नी, पति से बोली - हे.. जी,
थोड़ा हमें, अभिव्यक्ति और अनुभूति के बारे में
बताएँ --
है दोनों में क्या अन्तर
तनिक समझाएँ।

पति बोला -
-अनुभूति वो है जैसे
प्रेमिका की बात, पत्नी से न कही जाए
जिसका अन्दर ही अन्दर कर अनुभव
रस लिया जाए
चेहरे पे भाव प्रकट हों पर
जो शब्दों से न कहा जाए
वो, अनुभूति है डियर ...

और अभिव्यक्ति ?

जो तुम, मेरे चेहरे पे देख रही हो
बिन कुछ कहे सब पढ़ रही हो
कर कुछ नहीं सकती बस
अन्दर ही अन्दर कुढ़ रही हो
उसे अभिव्यक्ति कहते हैं डियर!

Sunday, January 4, 2009

३ झक मारता हूँ

किसीने मुझसे पूछा
क्या करते हो?

मैं बोला - झक मारता हूँ
वे बोले - भय्या-
ये तो सबसे बड़ा काम है
आज की दुनिया में
जो ये करता है उसीका नाम है।
संसद विधानसभाओं में
मंत्री संतरी क्या करते हैं?
अररे! झक मार मार कर
लोगों को झाँसा दे, देकर
संसद पहुँच कर मौज करते हैं।
आप पैदल
वो कारों में
तुम झोपड़ियों में
वे महलों में
ये सब इसी का कमाल है
इसी का धम्माल है।

जब वे महलों से नीचे देखते हैं
तो उनकी नज़रों में
मैं और आप-
कीड़े जैसे रेंगते हैं।
भय्या--
इसीलिए कहता हूँ
इस झक को कस के पकड़ लो
मैं तो कहता हूँ लटक लो
जैसे-
उमा भारती अटल को जकड़े थी
मायावती काशीराम को पकड़े थी
बना बनाकर सबको उल्लू मौज करो
चुगल चुगलीखोल बन
लड़ने लड़ाने के भेद सोचो
चुनाव में चुनाव लड़कर संसद पहुँचो
फिर जितनी झक मारनी है मारो!!
खुश रहो ऐश करो !