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Monday, January 5, 2009

एक प्रयास

गीत हो या गज़ल छ्न्द हो या रुबाई
ये तो कहने के बहाने हैं जिसमें तुम हो समाई !
देखा नहीं तुमने चाँद को कभी शरमाते हुए
आते ही आइना क्यूँ तुम शरमाई ........ !



वो मदस्त


Saturday, December 20, 2008

कामना

ओ करुणामयी
ओ ममतामयी
ओ सृष्टि के रचियता
ओ भाग्य विधाते
कुछ ऐसा कर दे
ऐसा वर दे
संताप धरा के हर दे...ओ...

नित नये सूरज उगें
नित नई प्रभातें हो
धरा के आंचल में
फूटे नित नये अंकुर हों
दरिद्रता हटे, हटा दे
मानव का तू उद्धार कर दे...ओ...

असहायों को मिले अभयदान
पीड़ितों को सम्मान मिले
अत्याचारों पर लगे अंकुश
मानवता को संबल मिले
कटुता मिटे, मिटा दे... ओ...

हो उज्जवल कामनाएँ
फलीभूत हो आशायें
भानु वेग भर वरुण का
वरदहस्त हो जीवन मस्त हो
चहुँ ओर खुशी हो
खुश हो खुशहाली भर दे...ओ...